छह मर्द मिलकर बारह औरतें की चुदाई किये
gangbang chudai story
जैसे-जैसे मौसी के घर का नाम मोहल्ले में फैला, वैसे-वैसे औरतें बढ़ती गईं। पहले दस थीं, फिर ग्यारह, फिर बारह। और मर्द वही तीन — मैं, सोनू और रोहन काका। हालत ये हो गई कि किसी रात तीन मर्दों को बारह औरतों में बँटना पड़ता। हर मर्द को चार-चार औरतें। और चुदाई वो चीज़ है जिसमें मर्द जल्दी थक जाता है और औरत देर से। इसलिए अक्सर ऐसा होता कि रात के दो बजे तक हम तीनों हाँफने लगते, और औरतें अभी भी पूरी भूखी बैठी रहतीं।
अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पढ़े की कैसे
मोहल्ले की औरतों की जबर्जस्त चुदाई खेल
एक रात मौसी ने देखा कि मैं चार औरतों को चोदकर चारपाई पर गिर पड़ा हूँ और साँस फूल रही है। मौसी ने हँसकर कहा, “वेद, तू तो ख़त्म हो गया। देख, अभी आठ औरतें बाक़ी हैं।”
मैंने हाँफते हुए कहा, “मौसी, अब और मर्द चाहिए। वरना हम मर जाएँगे।”
मौसी ने सोनू की तरफ़ देखा। सोनू भी उसी हालत में था। मौसी ने कहा, “सोनू, तू अपने किसी दोस्त को बुला ले। कोई तगड़ा हो, और शरमाने वाला न हो।”
सोनू ने सोचकर कहा, “मेरे दो दोस्त हैं — बंटी और करण। दोनों मेरे साथ जिम जाते हैं। बंटी इक्कीस का है, करण बाईस का। दोनों तगड़े हैं, और दोनों के लंड बड़े हैं। और दोनों की कोई गर्लफ्रेंड नहीं है, तो दोनों भूखे हैं।”
मौसी की आँखें चमक गईं, “बुला ले। और मोहल्ले से भी दो मर्द जोड़ लेंगे। अब तो पूरा अड्डा है, कोई शरम नहीं।”
और इस तरह अगले हफ़्ते से घर में छह मर्द हो गए — मैं, सोनू, रोहन काका, बंटी, करण और मोहल्ले से मनोज भाई। यानी तीन पुराने और तीन नए।
बंटी इक्कीस का, लंबा, पतला पर मज़बूत। जिम में उसने अपना बदन बनाया था — कंधे चौड़े, बाँहें मोटी, पेट सपाट। उसका लंड नौ इंच का था और मोटाई में सोनू से भी ज़्यादा। वो पहले तो शरमाया, लेकिन जब मौसी ने उसे देखा तो मुस्कुराकर बोली, “बंटी, तू तो पक्का मर्द लगता है।”
करण बाईस का, थोड़ा भरा हुआ, काला-साँवला, पर हँसता-बोलता। उसका लंड आठ इंच का और मोटा था। वो बेझिझक था — पहले ही दिन मौसी की चूचियों पर नज़र जमा दी और मौसी को हँसा दिया।
मनोज भाई पच्चीस के, मोहल्ले में रहते थे, दुकान चलाते थे। पत्नी गाँव में थी, वो अकेले रहता था। उसने सुना था कि नीलम के घर कुछ है, और वो खुद आ गया। उसका लंड छह इंच का था, लेकिन मोटा और टिकाऊ — “मैं रात भर चल सकता हूँ,” उसने शरमाकर कहा, और सब हँस पड़े।
अब पूरे घर में अठारह लोग थे — छह मर्द और बारह औरतें। और मौसी ने सबको बिठाकर कहा, “आज पहले दिन है, तो आज ‘मेला’ लगेगा। हर मर्द को दो औरतें मिलेंगी। और हिसाब बराबर रहेगा — कोई भूखा नहीं सोएगा।”
करण ने हँसकर कहा, “मौसी, दो औरतें? छह मर्द हैं, बारह औरतें। हर एक को दो। हिसाब ठीक है।”
मौसी ने उसे देखकर कहा, “करण, तू तेज़ निकला। अच्छा, तो तुझे सबसे पहले बारी मिलेगी।”
और करण की आँखें चमक गईं।
रात हुई, खाना खाया गया, और मौसी ने सबको बड़े कमरे में बुलाया। तीन-चार गद्दे पहले से जुड़े थे, चादरें बिछी थीं, और एक कोने में पानी और तौलिए रखे थे। मौसी ने सारी खिड़कियाँ बंद करवाईं और पंखा चलाया।
फिर उसने कहा, “आज नियम यह है — पहले सब कपड़े उतारेंगे। कोई शरम नहीं। जो शरमाएगा, उसकी चूत आज नहीं खुलेगी।”
बंटी और करण ने तो झट से कपड़े उतार दिए। मनोज भाई थोड़ा झिझके, लेकिन मौसी की नज़र पड़ी तो उन्होंने भी उतार दिए। औरतों ने भी एक-एक करके सब उतार दिया।
जब बारह औरतें नंगी खड़ी थीं, तो नज़ारा ऐसा था कि छह मर्दों के लंड पत्थर हो गए। हर बदन अलग — मौसी की बयालीस इंच की गांड और भारी चूचियाँ, सुनीता की दूध वाली छाती, शीला भाभी की भरी देह, कमला दीदी की गद्देदार चूचियाँ, रीना का कसा बदन, पूजा की छोटी कसी चूचियाँ, रानू की गोल गांड, नेहा की बड़ी गांड, मीना की गोरी देह, टीना की मासूम पतली देह, और दो नई — सरोज और पायल।
सरोज मौसी की पुरानी सहेली थी, चालीस की, बड़ी चूचियाँ, और पायल नेहा की सहेली, बाईस की, तगड़ी और हँसमुख।
बंटी ने सबको देखकर धीरे से सोनू से कहा, “यार, ये तो जन्नत है। इतनी औरतें?” और सोनू हँसकर बोला, “अब तेरी रातें सुधर जाएँगी।”
मौसी ने जोड़ियाँ बनाईं। हर मर्द को दो औरतें दीं:
मुझे — मौसी और पायल। सोनू को — रानू और नेहा। रोहन काका को — सुनीता और सरोज। बंटी को — शीला भाभी और पूजा। करण को — रीना और टीना। और मनोज भाई को — कमला दीदी और मीना।
फिर मौसी ने कहा, “पहले आधा घंटा सिर्फ़ फोरप्ले। कोई लंड अंदर नहीं डालेगा। पहले चूमो, चूसो, चाटो। औरतें पहले तैयार होंगी।”
और पूरा कमरा हलचल से भर गया।
मैं मौसी के पास गया और उसके होंठ चूमे। मौसी ने भी मुझे चूमा। हमारी जीभें लिपट गईं। फिर मैंने उसकी भारी चूचियाँ दबाईं और एक निप्पल मुँह में लेकर चूसा। मौसी कराह उठी, “आह वेद… ऐसे ही चूस… मेरे निप्पल…” और पायल पीछे से आकर मौसी की गांड दबाने लगी। पायल बेझिझक थी, उसने मौसी की गांड चूमी और उसके गड्ढे पर जीभ फेरी। मौसी दोनों तरफ़ से सहलाई जा रही थी।
फिर मैंने पायल को अपनी तरफ़ खींचा और उसके होंठ चूमे। पायल ने खुद मेरी जीभ अपने मुँह में ले ली, और मेरी कमीज़ पकड़कर मुझे अपने से चिपका लिया। मैंने उसकी चूचियाँ दबाईं और निपल्स चूसे, और पायल मेरे सिर को दबाने लगी, “आह वेद… चूस… ऐसे ही…” फिर मैंने उसकी चूत चाटी — उसकी बुर ताज़ी, कसी और गुलाबी थी, और जैसे ही मेरी जीभ पड़ी, पायल चीख पड़ी, “आह… वहीं… और अंदर… हाँ…”
इधर सोनू रानू और नेहा के साथ था। नेहा ने तो सोनू को खींचकर चूम लिया और उसका लंड हाथ में ले लिया। रानू ने उसके होंठ चूमे और उसकी चूचियाँ चूसीं। सोनू दोनों को बारी-बारी चूमता और उनकी चूतें चाटता।
रोहन काका सुनीता और सरोज दोनों सहेलियों को एक साथ लेकर बैठे थे और दोनों की चूचियाँ बारी-बारी चूस रहे थे। दोनों सहेलियाँ हँस-हँसकर एक-दूसरे को चूम रही थीं।
बंटी ने पहले शीला भाभी को लिया। शीला भाभी ने उसे देखकर कहा, “अरे, तू तो बच्चा लगता है।” और बंटी ने हँसकर कहा, “आंटी, बच्चा तो हूँ, पर लंड नौ इंच का है। देखो।” और शीला भाभी ने उसे देखकर आँखें बड़ी कर लीं। फिर बंटी ने उसकी चूत चाटी और शीला भाभी कराह उठी, “आह… दो साल बाद… ऐसे ही चाट…” और पूजा पीछे से बंटी की पीठ चूम रही थी।
करण ने रीना और टीना दोनों को एक साथ लिया — माँ और बेटी। उसने पहले रीना को चूमा, फिर टीना को। फिर दोनों की चूतें बारी-बारी चाटीं। टीना ने शरमाकर कहा, “करण भैया, मैं तो नई हूँ।” और करण हँसकर बोला, “कोई बात नहीं, टीना। आज सब तुझे प्यार से करेंगे।”
मनोज भाई कमला दीदी और मीना के साथ थे। कमला दीदी ने उन्हें देखकर कहा, “मनोज, तू तो पड़ोसी है। पता भी नहीं था।” और मनोज भाई ने शरमाकर कहा, “अब पता चल गया ना।” और वो भी उनकी चूतें चाटने लगे।
पूरे कमरे में चूमने, चूसने और चाटने की आवाज़ें गूँज उठीं। बारह औरतें कराह रही थीं, और छह मर्द उन्हें तैयार कर रहे थे।
आधे घंटे बाद मौसी ने कहा, “अब लंड डालो।” और पहला दौर शुरू हुआ।
मैंने पहले मौसी को घुटनों के बल किया और उसकी बयालीस इंच की गांड ऊपर उठाई। उसकी चूत पहले से गीली और खुली थी। मैंने लंड डालकर ठोकना शुरू किया। मौसी कराह उठी, “आह वेद… ऐसे ही ठोक… मेरी चूत फाड़ दे…” और पायल सामने बैठकर मौसी की चूचियाँ दबाने लगी और उन्हें चूसने लगी। मैं ठोकते-ठोकते झुककर मौसी की गर्दन चूमता और उसके कान में गालियाँ बकता, “ले मौसी, ले… तेरी चूत कितनी गरम है… तू तो पक्की रंडी है…” और मौसी जवाब देती, “हाँ रंडी हूँ… चोद-चोद…”
फिर मैंने पायल को लिटाया और उसकी कसी चूत में लंड डाला। पायल ने कराहकर मेरी कमर पकड़ ली, “आह वेद… ज़रा दर्द है… पर अच्छा भी…” मैंने धीरे-धीरे ठोका और फिर तेज़ किया। पायल की छोटी चूचियाँ झूलतीं और उसकी गांड लहराती। मैं ठोकते-ठोकते उसके होंठ चूमता, चूचियाँ दबाता, निपल्स चूसता।
इधर सोनू ने रानू को घुटनों के बल किया और उसकी चूत में अपना दस इंच का लंड डाला। रानू चीख पड़ी, “आआआह… फिर से…” और सोनू ठोकने लगा। नेहा पास बैठकर रानू की चूचियाँ चूस रही थी।
रोहन काका ने सुनीता को चारपाई पर लिटाया और उसकी चूत में लंड डालकर ठोकने लगे। सरोज पीछे से रोहन की पीठ चूम रही थी और सुनीता की गांड दबा रही थी।
बंटी ने शीला भाभी को घुटनों के बल किया और अपना नौ इंच का लंड उसकी चूत में डाला। शीला भाभी ने चीख पड़ी, “आआआह… इतना मोटा… अरे बंटी… मेरी चूत छोटी है…” और बंटी ने हँसकर कहा, “आंटी, आराम से लो। आज पूरी रात है।” और धीरे-धीरे ठोकने लगा। पूजा सामने बैठकर शीला भाभी की चूचियाँ चूस रही थी।
करण ने पहले रीना को चोदा — ज़ोर-ज़ोर से, और रीना बेबाक होकर गालियाँ बकने लगी, “चोद करण… ज़ोर से चोद… मेरी चूत में दम है…” और फिर टीना को — धीरे-धीरे, प्यार से। टीना कराह रही थी, “आह करण भैया… और ठोको…”
मनोज भाई ने कमला दीदी और मीना को बारी-बारी चोदा — धीरे-धीरे लेकिन टिकाऊ। वो दोनों को खूब ठोकते रहे और कमला दीदी ने हँसकर कहा, “मनोज, तू तो पड़ोसी था, अब पता चला कि तेरे में इतना दम है।”
आधे घंटे बाद मौसी ने कहा, “अब बदलो।” और जोड़ियाँ बदल गईं।
अब मैं नेहा और सरोज के पास गया। नेहा को घुटनों के बल किया और उसकी बड़ी गांड पकड़कर ठोका। नेहा बेबाक होकर चीख रही थी, “चोद वेद… ज़ोर से चोद… मेरी गांड दबा… ऐसे ही…” और फिर सरोज को — उसकी भारी चूचियाँ दबाईं, निपल्स चूसे, और उसकी चूत में लंड डाला। सरोज ने कराहकर कहा, “आह वेद… तेरी मौसी ने सच कहा था, तू कमाल का है।”
सोनू ने शीला भाभी और कमला दीदी को लिया। शीला भाभी ने सोनू का दस इंच का लंड देखकर कहा, “अरे, ये तो बंटी से भी बड़ा है।” और सोनू ने हँसकर कहा, “आंटी, आज पूरा ले लो।” और उसकी चूत में लंड डाल दिया। शीला भाभी चीख पड़ी और फिर कराहने लगी।
रोहन काका ने मौसी को लिया और उसकी गांड में लंड डालकर ठोकने लगे। मौसी दोनों तरफ़ से भरी हुई थी — चूत में रोहन का लंड और गांड में भी रोहन का? नहीं, रोहन ने पहले चूत में डाला, फिर गांड में। और बीच में मैंने आकर मौसी की चूत में लंड डाल दिया — यानी मौसी की चूत में मेरा और गांड में रोहन का। मौसी कराह उठी, “आआह… दोनों जगह… पूरी भर गई…”
बंटी ने पायल और टीना को लिया। दोनों जवान, दोनों कसी। बंटी ने पहले पायल को चोदा और फिर टीना को। दोनों ने बंटी के नौ इंच के लंड पर कराह-कराह कर मज़ा लिया।
करण ने मीना और रानू को लिया। करण हँसता-बोलता था, इसलिए दोनों लड़कियाँ खुल गईं। मीना तो अब बेझिझक हो चुकी थी और वो करण की कमर पकड़कर खुद ठोकरें ले रही थी।
मनोज भाई ने सुनीता और पूजा को लिया — माँ और बेटी। सुनीता ने हँसकर कहा, “मनोज, तू तो पड़ोसी है, अब रोज़ आया कर।” और मनोज भाई ने कहा, “बस तेरा इशारा चाहिए।”
अब मौसी ने कहा, “आज तीन औरतों की गांड खुलेगी — सरोज, पायल और शीला।” और यह सुनकर तीनों ने हाँ कर दी।
सबसे पहले शीला भाभी। उसने पहले तो झिझकी, “नीलम, गांड में भी? मैंने कभी नहीं करवाया।” मौसी ने कहा, “तो आज करवा ले। एक बार हो जाए, फिर तू खुद माँगेगी।” और शीला भाभी ने हाँ कर दी।
बंटी ने शीला भाभी की गांड पर थूका, चिकना किया, और लंड का सिरा गड्ढे पर रखा। शीला भाभी ने गहरी साँस ली और बंटी ने धीरे-धीरे धकेला। गड्ढा कसा था, लेकिन लंड अंदर चला गया। शीला भाभी ने चीख पड़ी, “आआआह… गांड में… हाय राम… जल रही है… पर अच्छा भी…” और बंटी ठोकने लगा।
फिर सरोज की गांड — रोहन काका ने ली। सरोज ने कराहकर कहा, “आह रोहन… कितना मोटा है… पूरा भर गया…” और रोहन ठोकते रहे।
और पायल की गांड — मैंने ली। पायल की गांड कसी और छोटी थी। मैंने धीरे-धीरे डाला और पायल की आँखों से पानी निकला, “आह वेद… रुको… धीरे…” फिर जब पूरा अंदर गया, तो पायल ने लंबी साँस छोड़ी, “आह… अंदर है… अब ठोको…” और मैं ठोकने लगा।
अब शीला भाभी की चूत में सोनू और गांड में बंटी — दोनों एक साथ। शीला भाभी दोनों जगह भरी हुई थी और बेबाक होकर चीख रही थी, “चोदो… दोनों चोदो… मेरी चूत फाड़ दो, गांड फाड़ दो…” और सरोज की चूत में मनोज भाई और गांड में रोहन काका। और पायल की चूत में करण और गांड में मैं।
पूरे कमरे में छह मर्द और बारह औरतें — कोई चुद रही थी, कोई चुदवा रही थी, कोई चूस रही थी, कोई चूसवा रही थी।
बीच में मौसी ने सबको रोककर कहा, “अब थोड़ा माँ-बेटी और सहेलियों का खेल।” और उसने जोड़ियाँ बनाईं — सुनीता-पूजा, रीना-टीना, और मौसी-रानू। तीन माँ-बेटी जोड़ियाँ।
तीनों जोड़ियाँ एक-दूसरे के सामने लेट गईं, टाँगें फैलाई हुईं। फिर माँ ने बेटी की चूत चाटी और बेटी ने माँ की। सुनीता ने पूजा की चूत चाटी और पूजा ने सुनीता की। रीना ने टीना की और टीना ने रीना की। मौसी ने रानू की और रानू ने मौसी की।
तीनों माँ-बेटी जोड़ियाँ एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं और कराह रही थीं। और बाक़ी औरतें — शीला, कमला, नेहा, मीना, सरोज, पायल — सब पास बैठकर यह नज़ारा देख रही थीं, और बीच-बीच में चूम-चूमकर मज़ा ले रही थीं।
सुनीता ने चाटते-चाटते कहा, “बेटा, तेरी चूत कितनी मीठी है।” और पूजा ने कहा, “मम्मी, आपकी भी।” रीना ने टीना से कहा, “बेटा, अब तू पूरी औरत बन गई।” और टीना ने शरमाकर मुँह छिपा लिया।
फिर मर्दों ने तीनों जोड़ियों को बारी-बारी चोदा। सुनीता की चूत में सोनू और पूजा की चूत में बंटी — माँ-बेटी एक साथ चुदीं। फिर रीना की चूत में करण और टीना की चूत में मनोज भाई। और मौसी की चूत में रोहन काका और रानू की चूत में मैं।
माँ-बेटी एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कराह रही थीं, और साथ-साथ चुद रही थीं। यह दृश्य ऐसा था कि सबकी आँखें भर आईं।
रात के चार बजे तक चुदाई चलती रही। सब पसीने से लथपथ, थके हुए, लेकिन तृप्त। मौसी ने आख़िरी दौर में सबको लाइन में लिटा दिया — बारह औरतें, टाँगें फैलाई हुईं, और छह मर्द उनके बीच घूम-घूमकर ठोकते रहे।
पहले बंटी निकला — उसने शीला भाभी की चूत में अपना सारा वीर्य डाला। शीला भाभी कराह उठी, “आह… गरम… मेरी चूत जल गई…” फिर बंटी ने पायल की चूत में डाला और पायल ने लंबी साँस छोड़ी।
करण ने रीना और टीना दोनों की चूतों में डाला। टीना ने चीख पड़ी, “आह करण भैया… गरम डाला…”
मनोज भाई ने कमला दीदी और मीना की चूतों में डाला। मनोज भाई ने हाँफते हुए कहा, “मौसी, अब तो हर हफ़्ते आऊँगा।”
रोहन काका ने मौसी की चूत में डाला। मौसी कराह उठी, “आह रोहन… पूरी भर गई…” फिर उन्होंने सुनीता और सरोज की चूतों में डाला।
सोनू ने रानू, नेहा, पूजा और शीला भाभी की चूतों में बारी-बारी डाला। रानू ने सोनू के लंड से बहते वीर्य को देखकर कहा, “आह सोनू भैया… इतना गरम…”
और मैंने पायल, सरोज, मीना और मौसी की चूतों में बारी-बारी अपना रस डाला। आख़िर में मौसी की चूचियों पर अपना बाक़ी रस डाल दिया और मौसी ने उसे चखा।
सब गद्दे पर लेट गए — अठारह लोग, एक-दूसरे से चिपके। मौसी बीच में थी। सुनीता ने पूजा को, रीना ने टीना को, मौसी ने रानू को गले लगा लिया।
मौसी ने कहा, “देखो, आज पूरा मोहल्ला एक हो गया। अब कोई शरम नहीं। हर हफ़्ते मेला लगेगा, और हिसाब बराबर रहेगा। कोई भूखा नहीं सोएगा।”
सुबह जब सूरज निकला, तो घर की हालत देखने लायक थी। चादरें बिखरी हुईं, तौलिए गीले, पानी का घड़ा खाली, और अठारह लोग अलग-अलग पड़े हुए। मौसी उठी, अँगड़ाई ली, और हँसकर बोली, “अब ये घर सिर्फ़ घर नहीं, एक मेला है।”
बंटी ने उठते हुए कहा, “मौसी, आज तो शरीर टूट गया, पर मज़ा ऐसा आया कि अब हर हफ़्ते आऊँगा।” करण ने कहा, “मौसी, हम दोनों को तो अब कहीं और जाने का मन नहीं करेगा।” और सब हँस पड़े।
मनोज भाई ने दुकान खोलने जाते-जाते कहा, “नीलम जी, आज दुकान में नींद आएगी, पर मन यहीं रहेगा।”
मोहल्ले में अगले दिन से और चर्चा होने लगी। पहले लोग कहते थे, “नीलम के घर कुछ है।” अब कहने लगे, “नीलम के घर सब कुछ है।” और जो औरतें अब तक नहीं आई थीं, वो भी बहाने बनाकर आने लगीं। घर में औरतों की संख्या बढ़ती गई और मर्दों की कमी फिर महसूस होने लगी।
एक दिन मौसी ने हँसकर कहा, “अब क्या करें? हर हफ़्ते दो नई औरतें आ रही हैं। मर्द छह हैं, औरतें अब चौदह हो गईं।”
और फिर एक दिन ऐसा हुआ जिसने पूरी कहानी बदल दी। एक दोपहर, जब हम सब आँगन में बैठे थे, दरवाज़े पर दस्तक हुई। मौसी ने दरवाज़ा खोला — और बाहर खड़ी थी मम्मी।
यानी मेरी मम्मी। मौसी की बहन।
मम्मी ने अंदर आकर चारों तरफ़ देखा, और फिर मौसी से पूछा, “नीलम, सच बता, इस घर में क्या चल रहा है? वेद इतना बदल क्यों गया है?”
अगले भाग में पढ़िए:
मम्मी अंदर आईं, सबको देखा, और मौसी ने उन्हें सब बताया। फिर उसी रात मम्मी भी उतर गईं। पैंतालीस की मम्मी, पतली कमर और भरी चूचियाँ वाली — उन्हें रोहन काका और मैंने मिलकर चोदा। मम्मी ने कराहकर कहा, “हाय राम, मेरा ही बेटा!” और मौसी हँस पड़ीं। अब घर में दो बहनें भी थीं — मौसी और मम्मी — और दोनों हमारी रंडियाँ। मोहल्ले की चर्चा और बढ़ गई।
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